Aatit ke patr swadhyay 9vi hindi | अतीत के पत्र कक्षा 9 हिन्दी

October 26, 2026 7:44 PM
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Class 9 Hindi Chapter 5 Atit Ke Patra Question Answer | ९वी हिंदी अतीत के पत्र स्वाध्याय

५. अतीत के पत्र स्वाध्याय इयत्ता नववी हिंदी (दूसरी इकाई पाठ 5 प्रश्न उत्तर)

श्रवणीय

‘वैष्णव जन तो तेणे कहिए‘ यह पद सुनिए और उसके आशय पर चर्चा कीजिए:-

कृति के आवश्यक सोपान :

• इस पद की रचना करने वाले का नाम पूछें।

• इस पद में कौन-से शब्द कठिन हैं, बताने के लिए कहें।

• पद से प्राप्त होने वाली सीख कहलवाएँ।

उत्तर:

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

पर दुख्खे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

सकळ लोक मान सहुने वंदे नींदा न करे केनी रे

वाच काछ मन निश्चळ राखे धन धन जननी तेनी रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

सम दृष्टी ने तृष्णा त्यागी पर स्त्री जेने मात रे

जिह्वा थकी असत्य ना बोले पर धन नव झाली हाथ रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

मोह माया व्यापे नही जेने द्रिढ़ वैराग्य जेना मन मान रे

राम नाम सुन ताळी लागी सकळ तिरथ तेना तन मान रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

वण लोभी ने कपट- रहित छे काम क्रोध निवार्या रे

भणे नरसैय्यो तेनुन दर्शन कर्ता कुळ एकोतेर तारया रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

पर दुख्खे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे

उत्तर:  वैष्णव जन तो तेणे कहिए‘ संत नरसी मेहता द्वारा रचित एक प्रसिद्ध गुजराती भजन है, जिसका मूल आशय सच्चे भक्त (वैष्णव जन) के आदर्श गुणों का वर्णन करना है, जिसमें दूसरों के दुख को समझना, निस्वार्थ भाव से मदद करना, सभी का सम्मान करना, वाणी-कर्म-मन से निष्छल (पवित्र) रहना, लालच और काम-क्रोध से दूर रहना तथा ईश्वर-भक्ति में लीन रहना प्रमुख हैं; यह भजन गांधीजी की प्रार्थना का भी हिस्सा था और एक सच्चे इंसान के जीवन-मूल्यों को दर्शाता है। इस पद में सहुने, केनी, वाच, काछ, ताळी, भणे इत्यादी कठीण शब्द आए हुए हैं |

Hindi Lokbharti 9th Answers Chapter 5 Questions and Answers | Std 9 Hindi Chapter 5 Atit Ke Patra Question Answer Maharashtra Board

पठनीय

गांधीजी द्वारा लिखित ‘मेरे सत्य के प्रयोग‘ (आत्मकथा)पुस्तक का कोई अंश पढ़िए।

उत्तर : 

            गांधीजी की ‘सत्य के प्रयोग‘ से एक अंश यह है कि वे ईश्वर- साक्षात्कार और मोक्ष के लिए जीते थे, और उनके राजनीतिक प्रयोग भी इसी लक्ष्य के लिए थे; वे बताते हैं कि कैसे बचपन में राजा हरिश्चंद्र और श्रवण की कहानियों से प्रभावित होकर उन्होंने सत्य का पालन करने का निश्चय किया, और कैसे ज्योमेट्री और संस्कृत जैसी कठिनाइयों से पार पाया। उनकी आत्मकथा में वे अपनी कच्ची अहिंसा और सत्य की अपूर्णता को स्वीकार करते हैं, और यह बताती है कि कैसे वे सांसारिक आकर्षणों से उबरते हुए आत्म-साक्षात्कार के पथ पर चले।

Maharashtra State Board Class 9 Hindi Solutions  | Lokbharti Chapter 5 अतीत के पत्र

संभाषणीय

किसी महान विभूति के जीवन संबंधी कोई प्रेरक प्रसंग बताइए।

उत्तर:

            एक बार स्वामी विवेकानंद हिमालय की यात्रा पर थे, तभी उन्होंने वहाँ एक वयोवृद्ध आदमी को देखा, जो बिना कोई आशा लिये अपने पैरो की तरफ देख रहा था और आगे जानेवाले रास्ते की तरफ देख रहा था। तभी उसने स्वामीजी से कहा, “हेल्लो सर, अब इस दुरी को कैसे पार किया जाये, अब मै और नही चल सकता।” स्वामीजी शांति से उस इंसान की बाते सुन रहे थे और उसका कहना पूरा होने के बाद उन्होंने जवाब दिया की, “निचे अपने पैरो की तरफ देखो। तुम्हारे पैरो के निचे जो रास्ता है वो वह रास्ता है जिसे तुमने पार कर लिया है और यह वही रास्ता था जो पहले तुमने अपने पैरो के आगे देखा था। अब आगे आने वाला रास्ता भी जल्द ही तुम्हारे पैरो के निचे होंगा।” स्वामीजी के इन शब्दों से उस वयोवृद्ध इंसान को अपने लक्ष्य को पूरा करने में काफी सहायता मिली।

Std 9 hindi chapter 5 Atit Ke Patra swadhyay  | 9th Digest Chapter 5

लेखनीय

‘गांधी जयंती‘ के अवसर पर आकर्षक कार्यक्रम पत्रिका तैयार कीजिए।

उत्तर:

मौलिक सृजन

‘मेरे सपनों का भारत‘ विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर:

मेरे सपनों का भारत

भारत विविधता में एकता की एक अनूठी मिसाल है, जहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का संगम होता है। एक विद्यार्थी के रूप में, मैं एक ऐसे भारत की कल्पना करती हूँ जो न केवल आधुनिकता की दौड़ में सबसे आगे हो, बल्कि अपनी नैतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। मेरे सपनों का भारत निम्नलिखित स्तंभों पर आधारित होगा:

वर्तमान में हमारे समाज में लिंग, जाति, धर्म और आर्थिक स्थिति के आधार पर जो दूरियाँ दिखाई देती हैं, मेरे सपनों के भारत में उनका कोई स्थान नहीं होगा। मैं एक ऐसे समाज का सपना देखती हूँ जहाँ हर व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता के आधार पर सम्मान और अवसर मिले।

यद्यपि भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन मेरा सपना है कि देश का हर बच्चा ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा‘ प्राप्त करे। मेरा भारत एक ऐसा ‘ज्ञान का केंद्र‘ (Knowledge Hub) बने जहाँ अनुसंधान (Research) और नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिले, ताकि हम समस्याओं के समाधान के लिए आत्मनिर्भर बन सकें।

अक्सर विकास की दौड़ में हम अपनी प्रकृति और संस्कृति को पीछे छोड़ देते हैं। मेरे सपनों का भारत वह होगा जो मंगलयान भी भेजेगा, लेकिन साथ ही अपनी प्राचीन कला, योग और भाषाई समृद्धि को भी गर्व से सहेजेगा। यहाँ की नदियाँ स्वच्छ होंगी और हिमालय की गोद सुरक्षित होगी।

मैं एक ऐसे भारत का सपना देखती हूँ जहाँ कोई भी भूखा न सोए और स्वास्थ्य सेवाएँ हर गरीब की पहुँच में हों। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और न्याय प्रणाली मेरे सपनों के भारत की रीढ़ होगी।

Textbook Exercise Important Questions and Answers. | Hindi Lokbharti 9th Digest Chapter 5

आसपास

हमारी ऐतिहासिक स्मृतियाँ जगाने वाले स्थलों की जानकारी प्राप्त कीजिए और उनपर टिप्पणी बनाइए। जैसे – आगाखान पैलेस, पुणे।

उत्तर:

हमारी ऐतिहासिक स्मृतियाँ जगाने वाले कुछ स्थल :

(१) ताज महल – दुनिया के सात अजूबों में से एक

(२) कुतुब मीनार – बलुआ पत्थर से बनी ऊंची मीनार

(३) लाल किला – आकर्षक विस्तार

(४) हुमांयू का मकबरा- बगीचा और मकबरा एक साथ

(५) हवा महल – गुलाबी शहर का गौरव

(६) सांची स्तूप – बुद्ध के जीवन की समझ

(७) कोणार्क मंदिर – सूर्य देव को समर्पित मंदिर

पाठ के आंगन में

(१) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

(क) कार्य :

स्वास्थ्य सुधार के लिए विनोबा जी द्वारा किए गए कार्य :-

उत्तर:

१. दस-बारह मील घूमना

२. छह से आठ सेर अनाज पीसना

३. तीन सौ सूर्य नमस्कार करना

४. नमक और सभी मसाले छोड़ देना

 

(ग) अर्थ लिखिए :-

१. ‘अपरिग्रह‘ शब्द से तात्पर्य है कि

उत्तर: संग्रह न करना।

२. ‘रमता राम‘ शब्द से तात्पर्य है कि

उत्तर: फक्कड़- एक स्थान पर न टिकने वाला।

(२) ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है‘ – इस पर स्वमत लिखिए।

उत्तर:

यह सर्वविदित सत्य है कि हमारा शरीर और मन एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि शरीर अस्वस्थ है, तो मन कभी भी एकाग्र या प्रसन्न नहीं रह सकता।

जब हम शारीरिक रूप से फिट महसूस करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में सकारात्मक हार्मोन का संचार होता है। इसके विपरीत, यदि हमें हल्का सा सिरदर्द या बुखार भी हो, तो हम किसी भी रचनात्मक कार्य में मन नहीं लगा पाते। एक बीमार शरीर व्यक्ति के उत्साह और आत्मविश्वास को कम कर देता है।

एक विद्यार्थी के रूप में, पढ़ाई में एकाग्रता (Concentration) के लिए शारीरिक स्वास्थ्य अनिवार्य है। यदि हम नियमित व्यायाम, योग और संतुलित आहार लेते हैं, तो हमारी स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता बढ़ती है। स्वस्थ शरीर हमें तनाव और परीक्षा के दबाव से लड़ने की शक्ति देता है।

स्वस्थ व्यक्ति का दृष्टिकोण हमेशा आशावादी होता है। जब शरीर स्फूर्तिवान होता है, तो मन में नए विचार और संकल्प जन्म लेते हैं। एक स्वस्थ मन ही धैर्य, सहनशीलता और प्रेम जैसे मानवीय गुणों को विकसित कर सकता है, जो एक अच्छे समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

अतीत के पत्र Questions And Answers | Hindi Lokbharti 9th Std Digest Chapter 5

भाषा बिंदू

* अर्थ की दृष्टि से वाक्य परिवर्तित करके लिखिए :-


उत्तर: 

 

रचना बोध

उत्तर:

पहले पत्र में, विनोबा भावे की देशसेवा के प्रति प्रतिबद्धता, कठोर परिश्रम, अनुशासन और महात्मा गांधी के प्रति उनकी निष्ठा और आदर का वर्णन है। वहीं, दूसरे पत्र में महात्मा गांधी का विनोबा भावे के प्रति गहरा विश्वास और पितातुल्य प्रेम उजागर होता है। इन पत्रों को पढ़कर मानवीय मूल्यों को समझने और उन्हें अपनाने की प्रेरणा मिलती है, और इसके साथ ही ये पत्र स्वास्थ्य के महत्व के प्रति भी जागरूक करते हैं।

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