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स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है ८वी हिंदी प्रश्न उत्तर | Swarajya mera janmasidha adhikar hai 8vi hindi Question Answer

October 15, 2026 10:56 PM
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स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है स्वाध्याय हिंदी आठवी | आठवी हिंदी digest

 

 

Swarajya mera janmasidha adhikar hai question answer pdf  स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है   digest pdf  Swarajya mera janmasidha adhikar hai question answer pdf

*
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-


(१)
विधानों को पढ़कर गलत विधानों को सही करके लिखो :

१.
टिळक जी ने कहा है कि
, वे यद्यपि शरीर से जवान है किंतु उत्साह में बूढ़े हैं।

उत्तर: गलत

सही विधान

टिळक जी ने कहा है कि वे यद्यपि
शरीर से बूढ़े हैं किंतु उत्साह में जवान हैं।

 

२.
प्रांतीय सम्मेलन अंग्रेजों की देन है।

उत्तर: गलत

सही
विधान

प्रांतीय
सम्मेलन कांग्रेस की देन है।

 

स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है   question answer | Swarajya mera janmasidha adhikar hai

(२)
टिप्पणी लिखो :


१.
लोकमान्य टिळक

उत्तर:

लोकमान्य
तिलक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। भारत को स्वतंत्र कराने के लिए उन्होंने
सभी भारतीयों को एकता के सूत्र में बाँधने का भरसक प्रयास किया।
“स्वराज्य
मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है
” उनका
प्रसिद्ध नारा था। उन्होंने अंग्रेजों से भारत छोड़ने की माँग की और देश के लिए पूर्ण
स्वराज्य
की आवाज़ बुलंद की।

 

२.
होमरूल

उत्तर:

भारत को आज़ाद कराने के लिए लोकमान्य तिलक ने भारत में होमरूल लीग की स्थापना की। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत को स्वतंत्र बनाना और
भारतीयों में स्वशासन की भावना जागृत करना था। होमरूल लीग के माध्यम से तिलक जी ने
लोगों को यह समझाया कि उन्हें अपने देश पर स्वयं शासन करने का अधिकार है। यह
आंदोलन शांतिपूर्ण तरीकों से चलाया गया और इसका प्रभाव पूरे देश में धीरे-धीरे
फैलने लगा।

होमरूल
लीग के पीछे छिपी भावना अमर और अविनाशी थी। यह भावना जनता के मन में धीरे-धीरे घर
कर रही थी और लोगों को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ रही थी। तिलक जी का विश्वास था कि
जागरूक और संगठित जनता ही स्वतंत्रता प्राप्त कर सकती है। इसलिए उन्होंने सभाओं
, लेखों और भाषणों के माध्यम से लोगों को एकजुट किया।

होमरूल लीग ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी और आगे चलकर पूर्ण
स्वराज्य की माँग को मजबूत आधार प्रदान किया।


स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार pdf | Swarajya mera janmasidha adhikar hai question answer

(३)
उत्तर लिखो :

१.
लोकमान्य टिळक जी द्वारा दिया गया नारा :

उत्तर:

स्वराज्य
मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।

 

(१)         
कृति पूर्ण
करो :

स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है   ८वी हिंदी प्रश्न उत्तर | Swarajya mera janmasidha adhikar hai 8vi hindi Question Answer



उत्तर:

जन्मसिद्ध
अधिकार की विशेषताएँ

१. कोई
हथियार इस भावना को काट नहीं सकता।

२. कोई
आग इसे जला नहीं सकती।

३. कोई
जल इसे भिगो नहीं सकता।

४. कोई
हवा इसे सुखा नहीं सकती।

५.
दिलवाना : राधा ने अपनी बीमार बहन को नर्स के द्वारा औषधि दिलवाई।

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भाषा बिंदु

 

पाँच-पाँच
सहायक और प्रेरणार्थक क्रियाओं का अपने स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग करो।

उत्तर:

१.
चुकना: पिता जी अखबार पढ़ चुके हैं।

२.
लगना: माताजी खाना बनाने लगी।

३.
रहना : वे सिनेमा देख रहे हैं।

४.
सकना : वह अपना काम समय पर कर सका।

५.
चाहना : उसने अपना काम करना चाहा।

प्रेरणार्थक
क्रिया:

१.
पढ़वाना: अध्यापक छात्रों से पाठ पढ़वाते हैं।

२.
लिखवाना: सीता अपने बच्चों से कविता लिखवाती है।

३.
करवाना: माँ ने घर का सारा काम अपने बच्चों से करवाया।

४.
खिलवाना: उसने हमें खाना खिलवाया।

५.
दिलवाना : राधा ने अपनी बीमार बहन को नर्स के द्वारा औषधि दिलवाई।


स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है   स्वाध्याय | स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है   स्वाध्याय हिंदी

 

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उपयोजित लेखन

अपने
विद्यालय में आयोजित
‘स्वच्छता अभियान‘ का वृत्तांत लिखो। वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का
उल्लेख आवश्यक है।

उत्तर:

विद्यालय
में आयोजित ‘स्वच्छता अभियान’ का वृत्तांत

दिनांक 5 सितंबर 2025 को हमारे सरस्वती माध्यमिक विद्यालय,
नगर रोड, में एक स्वच्छता अभियान का आयोजन
किया गया। कार्यक्रम का समय प्रातः
9 बजे से 11 बजे तक निर्धारित था। इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता
के प्रति जागरूकता फैलाना और विद्यालय परिसर को साफ-सुथरा बनाना था।

कार्यक्रम
की शुरुआत प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य महोदय के संबोधन से हुई। उन्होंने
स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ जीवन
संभव है। इसके बाद सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को समूहों में बाँटा गया। कुछ
समूहों ने कक्षाओं की सफाई की
, कुछ ने विद्यालय के प्रांगण,
बगीचे और खेल मैदान की सफाई की। विद्यार्थियों ने झाड़ू लगाई,
कचरा इकट्ठा किया और उसे कूड़ेदान में डाला।

इस
अवसर पर स्वच्छता से संबंधित नारे भी लगाए गए
, जिससे पूरे परिसर में
उत्साह का वातावरण बन गया। अभियान के अंत में सभी ने स्वच्छता बनाए रखने की शपथ
ली।

यह
स्वच्छता अभियान बहुत सफल रहा। इससे हमें स्वच्छ रहने और दूसरों को भी स्वच्छता के
लिए प्रेरित करने की सीख मिली।

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मैने समझा

लोकमान्य टिळक
के मन में उठ रही स्वराज्य की भावना का महत्त्व समझने के साथ ही राजनीति
, धर्म, स्वशासन आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त
की।

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स्वयं अध्ययन

पाठ
में प्रयुक्त उद्धरण
, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्द
आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।

उत्तर:

उद्धरण
– स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।

सुवचन-
आत्मा अमर है। मुहावरा- आँखों से परदा हटाना।

 

आलंकारिक
शब्द- अज्ञातवास
, मरुभूमि

 

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मौलिक सृजन

            केसरी
मराठी भाषा का एक समाचारपत्र है जिसकी स्थापना १८८१ में बाल गंगाधर तिलक ने की थी।
इस पत्र का उपयोग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वाणी देने के लिये की गयी। यह समाचारपत्र
आज भी तिलक जी के वंशजों एवं केसरी महरट्टा ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित होता है। तिलक
जी ने केसरी में “देश का दुर्भाग्य” नामक शीर्षक से लेख लिखा जिस में
ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया
, परिणाम स्वरूप उन्हें ६ वर्ष के कठोर कारावास के अंतर्गत
वर्मा के मांडले जेल में बंद कर दिया गया।

कारावास के दौरान तिलक ने “आर्कटिक होम ऑफ द
वेदाज” तथा “गीता रहस्य” नामक ग्रंथ की रचना की। तिलक को भारतीय दंड
संहिता की धारा १२४ ए के अंतर्गत राजद्रोह के अभियोग में २७ जुलाई १८९७ को
गिरफ्तार कर लिया गया १८७० में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय दंड संहिता में धारा १२४-ए
जोड़ा जिसके अंतर्गत “भारत में विधि द्वारा स्थापित ब्रिटिश सरकार के प्रति विरोध
की

भावना भड़काने वाले व्यक्ति को ३ साल की कैद से लेकर
आजीवन देश निकाला तक की सजा दिए जाने का प्रावधान था।”

 

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श्रवणीय


राष्ट्रीय त्योहारों पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं
द्वारा दिए गए वक्तव्य सुनो और मुख्य मुद्दे सुनाओ।

राष्ट्रीय त्योहारों पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा दिए गए
वक्तव्य के मुख्य मुद्दे :

• भारत की पारतंत्र के समय में स्थिति

• भारतियों पर होने वाले अत्याचार

• क्रांतिकारकों के वीर कार्य

• भारतियों को कैसा रहना चाहिए

 

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संभाषणीय

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध घोषवाक्यों की
सूची बनाकर उनपर गुट में चर्चा करो।

• आराम हराम है।

• साइमन कमीशन
गो बॅक।

• दुश्मन की
गोलियों का हम सामना करेंगे
,

आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे।

 

• सारे जहाँ से
अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

• वंदे मातरम।

• करो या मरो।

• सत्यमेव जयते।

• इंकलाब
जिंदाबाद।

• तुम मुझे ख़ून
दो
, मैं
तुम्हें आज़ादी दूँगा।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नारों की विशेष भूमिका है। स्वतंत्रता के
लिए बोले गए हर नारे ने भारतीय क्रांतिकारियों में जान फूंक दी कि हर नारा अंग्रेजों
के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ।


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भलेखनीय

राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत चार पंक्तियों की
कविता लिखो।

उत्तर:

मेरा देश मेरी पहचान है, मेरा गर्व, मेरा अभिमान है।
इसकी मिट्टी में बसी है, बलिदानों की महान
गाथा।

वीरों के रक्त से सींची, यह धरती हमें पुकारे,
हर कण-कण में गूँज रहा, भारत माँ का जयकारा।

सीमा पर जो जाग रहे हैं, चैन से हम सो पाते हैं,
किसान की मेहनत से ही, अन्न का दाना आता है।
भाषा, धर्म, वेश भले हों,
अलग-अलग पहचान,
दिल से हम सब एक हैं, यही भारत की शान।

देश के लिए जीना-मरना, हमारा पक्का प्रण है,
सत्य, अहिंसा, प्रेम यही,
भारत का जीवन-धन है।

 

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पठनीय

सुभद्राकुमारी
चौहान की
‘झाँसी की रानी‘ कविता पढ़ो।

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