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९. नहीं कुछ इससे बढ़कर ८वी हिंदी प्रश्न उत्तर | Nahi kuch isasae badhakar 8vi hindi Question Answer

October 15, 2026 10:29 PM
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नहीं कुछ इससे बढ़कर स्वाध्याय हिंदी आठवी | आठवी हिंदी digest

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*
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-


(१)
संजाल पूर्ण करो :

उत्तर:

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(२)
कृति करो :

९. नहीं कुछ इससे बढ़कर ८वी हिंदी प्रश्न उत्तर | Nahi kuch isasae badhakar 8vi hindi Question Answer

(३)
अंतिम चार पंक्तियों का अर्थ लिखो।

उत्तर:

कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से लोक अर्थात सज्जन
व्यक्ति के महत्त्व को स्थापित किया है। सज्जन व्यक्ति अपने इस जीवनरूपी मधुरस को चखते
हैं अर्थात जीवन के सुख-दुख का अनुभव प्राप्त करते हैं। वे जीवन के उतार-चढ़ाव का
सामना करते हुए विपुल मनोवैभव संचित करते हैं अर्थात मानसिक रूप से समृद्ध बन जाते
हैं। जन मधुकर अर्थात मानवरूपी सज्जन भौरे जब किसी को पीड़ा में देखते हैं
, तो उनका मन
द्रवित हो जाता है। इस संसार के दुख-दर्द को दूर करने के लिए वे अपने अनुभव से
संसाररूपी छत्ते का पुनः निर्माण करते हैं अर्थात वे अपने अनुभव व ज्ञान से
जरूरतमंदों की यथायोग्य सहायता कर उनके जीवन में खुशियाँ भर देते हैं। कवि कहते है
कि सज्जन व्यक्तियों के इन कर्मों से अधिक पवित्र कोई अन्य प्रार्थना नहीं हो सकती
है।

 

(४)
कविता में उल्लिखित मानव के विभिन्न रूप लिखो:

उत्तर:

१.
जननी

२.
कृषक

३.
कलाकार

४. कवि

 

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भाषा बिंदु

निम्न
शब्दों के लिंग तथा वचन बदलकर वाक्यों में प्रयोग करो :

लिंग –
कवि
, माता, भाई, लेखक

वचन –
दुकान
, प्रार्थना, अनुभूति, कपड़ा, नेता

उत्तर:

1) कवि
– कवयित्री

बहिणाबाई
चौधरी मराठी की एक श्रेष्ठ कवयित्री थी।


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2) माता
– पिता

पिता
हर घर का छत्र होता है।

3) भाई
– बहन

मेरी
बहन मेरा बहुत ख्याल रखती है।

4) लेखक
-लेखिका

मनू
भंडारी हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका है।

5)दुकान – दुकानें

होली
के दिन बाजार की सभी दुकानें बंद थी।

6) प्रार्थना – प्रार्थनाएँ

माँ
बच्चों के लिए ईश्वर के पास प्रार्थनाएँ करती रहती है।

7) अनुभूति – अनुभूतियाँ

मेरी
अनुभूतियाँ किताब पढ़ने के लिये बहुत अच्छी है।

उपयोजित लेखन

‘सड़क दुर्घटनाएँ : कारण एवं
उपाय
‘ निबंध लिखो।

उत्तर:

सड़क दुर्घटनाएँ : कारण एवं उपाय

  आज के समय में सड़क दुर्घटनाएँ एक गंभीर और चिंताजनक समस्या
बन गई हैं। बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या के साथ-साथ दुर्घटनाओं में भी
लगातार वृद्धि हो रही है। प्रतिदिन समाचार पत्रों और समाचार माध्यमों में सड़क
दुर्घटनाओं की खबरें पढ़ने और सुनने को मिलती हैं
, जिनमें अनेक लोग अपनी जान गँवा
देते हैं और कई लोग जीवन भर के लिए अपंग हो जाते हैं। इससे न केवल परिवारों को
गहरा दुख होता है
, बल्कि समाज और देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण हैं। तेज़ गति से वाहन चलाना
इसका सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा यातायात नियमों की अनदेखी
, नशे की हालत
में वाहन चलाना
, मोबाइल फोन पर बात करते हुए ड्राइविंग करना और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के
वाहन चलाना भी दुर्घटनाओं को बढ़ाता है। कई बार खराब सड़कों
, गड्ढों, ट्रैफिक
संकेतों की कमी और स्ट्रीट लाइट न होने के कारण भी दुर्घटनाएँ होती हैं। कुछ चालक जल्दबाज़ी
और लापरवाही के कारण दूसरों की जान को खतरे में डाल देते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनेक उपाय किए जा सकते
हैं। सबसे पहले सभी लोगों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। वाहन हमेशा
निर्धारित गति में चलाना चाहिए और नशे की हालत में कभी भी वाहन नहीं चलाना चाहिए।
दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य
रूप से करना चाहिए। सरकार को सड़कों की मरम्मत
, स्पष्ट ट्रैफिक संकेत लगाने और
यातायात व्यवस्था को सख्त बनाने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही लोगों में सड़क
सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना भी बहुत आवश्यक है।

सड़क दुर्घटनाएँ मानव की लापरवाही का परिणाम हैं। यदि हम
सभी जिम्मेदारी से वाहन चलाएँ और नियमों का पालन करें
, तो इन दुर्घटनाओं को काफी हद तक
कम किया जा सकता है और अनेक बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकते हैं।


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मैने समझा

उत्तर:

इस कविता से मैंने यह समझा कि
मनुष्य को हर परिस्थिति में प्रकृति
, जीवन और मानवता के प्रति संवेदनशील
होना चाहिए। कवि कहता है कि जन्म के समय माँ की पीड़ा
, प्रकृति
की कठोरता
, कलाकार की मेहनत और सैनिक के बलिदान को हल्के में
नहीं लेना चाहिए। ये सभी जीवन के महत्वपूर्ण सत्य हैं
, जिन्हें
समझना और उनका सम्मान करना आवश्यक है।

कविता हमें यह भी सिखाती है कि
हमें हर बात के लिए ईश्वर से प्रार्थना करने के बजाय अपने कर्तव्यों को समझना
चाहिए। जब हम दूसरों के दुख
, परिश्रम और बलिदान को पहचानते हैं,
तभी हम सच्चे अर्थों में मानव बनते हैं। यह कविता हमें संवेदनशील,
कर्तव्यनिष्ठ और जागरूक बनने की प्रेरणा देती है।

 

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स्वयं अध्ययन

‘राष्ट्रसंत तुकडो जी के सर्वधर्मसमभाव‘
पर आधारित गीत पढ़ो और इसपर आधारित चार्ट बनाओ।

उत्तर:

राष्ट्रवंदना

तन-मन-धन
से सदा सुखी हो
, भारत देश हमारा ।

सभी
धर्म अरु पंथ पक्ष को
, दिलसे रहे पियारा ।।

विजयी
हो
, विजयी
हो
, विजयी
हो
, भारत
देश हमारा ।।टेक।।

निर्भय
हो यह देशकी माता
, मंगल कीर्ति कराने ।

सत्य-शील, अरु निर्मल
मनसे
, वीरों को उपजाने ।

सदूगुणी
हो यह देश की जनता
, जीवन सुख सजवाने।

रंक-राव-पंडीत-भिकारी, सबको सुख
दिलवाने।

विजयी
हो
, विजयी
हो
, विजयी
हो
, भारत
देश हमारा ।। 1।।

स्पृश्यास्पृश्य
हटे यह सारा
, देश कलंक मिटाने।

सबके
मन कर्तव्यशील हो
, धन उद्योग बढाने ।

सबका
हो विश्वास प्रभू पर
, अपनी शक्ति बढाने ।

ब्रहमचर्य
अध्यात्म दैविगुण
, घर घर में प्रगटाने ।

सारा भारत
रहे शिपाई
, शत्रु को दहशाने ।

तुकड्यादास
कहे स्फूर्ति हो
, सबको भक्ती करने ।

 विजयी
हो
, विजयी
हो
, विजयी
हो
, भारत
देश हमारा ।। 2 ।। 

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कल्पना पल्लवन

‘मनःशांति के लिए चिंतन-मनन आवश्यक
है
‘ इसपर अपने विचार लिखो।

उत्तर:

आज के व्यस्त जीवन में मनुष्य हमेशा भागदौड़ और तनाव में
रहता है। ऐसे समय में मनःशांति बनाए रखना बहुत आवश्यक हो गया है। मेरे विचार से
मनःशांति पाने के लिए चिंतन-मनन बहुत जरूरी है। चिंतन-मनन का अर्थ है अपने विचारों
और कार्यों पर शांत मन से सोच-विचार करना।

जब हम कुछ समय अकेले बैठकर अपने दिनभर के कामों और
व्यवहार पर विचार करते हैं
, तो हमें अपनी
गलतियों और अच्छाइयों का पता चलता है। इससे हम अपने जीवन को सही दिशा दे सकते हैं।
चिंतन-मनन से मन को शांति मिलती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। यह हमें क्रोध
, चिंता और तनाव से दूर रखता है।

चिंतन-मनन करने से हमारी सोच सकारात्मक बनती है। हम कठिन
परिस्थितियों में भी धैर्य से काम लेना सीखते हैं। विद्यार्थी जीवन में यह बहुत
उपयोगी है
, क्योंकि इससे एकाग्रता बढ़ती है
और पढ़ाई में मन लगता है।

अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि यदि हम प्रतिदिन थोड़ा
समय चिंतन-मनन के लिए निकालें
, तो हमारा मन
शांत रहेगा और जीवन सुखमय बनेगा।

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