धरती का आँगन महके स्वाध्याय हिंदी आठवी | आठवी हिंदी Digest
धरती का आँगन महके कविता का स्वाध्याय
*
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१) प्रवाह तालिका पूर्ण करो :
उत्तर:
(१)
कृति पूर्ण
करो :
उत्तर :
धरती का आँगन महके कविता का भावार्थ pdf | Dharti ka aangan mahake question answer
(२) उत्तर लिखो :
१. मेधा की ऊँचाई
नापेगा –
उत्तर:
प्रतिभा का पैमाना।
२.हम सब मिलकर
करें –
उत्तर:
जयगान से वसुधा कि अर्चना।
(४)
कृति करो :
उत्तर:
(अ) निम्नलिखित शब्दों के
समानार्थी शब्द लिखो तथा उनका वाक्यों में प्रयोग करो:
शरीर, मनुष्य, पृथ्वी, छाती, पथ
शरीर
उत्तर:
समानार्थी
शब्द: शरीर = तन
वाक्य प्रयोग : उसका शरीर बलवान है।
मनुष्य
उत्तर:
समानार्थी
शब्द: मनुष्य = मानव
वाक्य
प्रयोग :वही मनुष्य है, जो मनुष्य के
लिए मरे।
पृथ्वी
उत्तर:
समानार्थी
शब्द: शरीर = तन
वाक्य
प्रयोग : उसका शरीर बलवान है।
छाती
उत्तर:
समानार्थी
शब्द: पृथ्वी = वसुधा
वाक्य
प्रयोग : यह पृथ्वी हमारी माता है।
पथ
उत्तर:
समानार्थी
शब्द: छाती = सीना
वाक्य
प्रयोग : वीर की छाती चौड़ी होती है।
धरती का आँगन महके स्वाध्याय हिंदी | dharti ka aangan mahake question answer pdf
(आ) पाठों में आए सभी प्रकार के
सर्वनाम ढूँढ़कर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग करो।
हम सब: हम सब बच्चे दुनिया का भविष्य है और हमसे ही हमारा देश
है।
आपका: आप हमारे अतिथि हो। आपका स्वागत करना हमारा धर्म है।
आपकी: हम आपकी बातों को मान कर ही आगे कदम बढ़ाएँगे।
'छाते की आत्मकथा' विषय पर निबंध
लिखो।
उत्तर:
छाते
की आत्मकथा
मैं एक साधारण-सा छाता हूँ, लेकिन मेरा जीवन भी कम रोचक
नहीं है। मेरा जन्म एक कारखाने में हुआ था। वहाँ मेरी डंडी, कपड़ा और
तीलियाँ बड़े प्यार से जोड़ी गईं। तैयार होते ही मुझे एक दुकान में सजा दिया गया।
कुछ दिनों बाद एक विद्यार्थी ने मुझे खरीदा और तभी से मैं उसके साथ रहने लगा।
बरसात के दिनों में मेरा महत्व सबसे अधिक होता है। जब
काले बादल घिर आते हैं और तेज़ बारिश शुरू हो जाती है, तब मैं अपने मालिक को भीगने से
बचाता हूँ। स्कूल जाते समय, बाज़ार में चलते हुए या यात्रा के दौरान मैं हमेशा उसके
सिर पर तना रहता हूँ। बारिश की ठंडी बूँदें मुझ पर गिरती हैं, पर मुझे खुशी
होती है कि मैं किसी के काम आ रहा हूँ।
कभी-कभी तेज़ हवा में मेरी तीलियाँ उलट जाती हैं और मुझे
बहुत कष्ट होता है। कुछ लोग ग़ुस्से में मुझे ज़ोर से खींचते हैं, जिससे मेरा
कपड़ा फट जाता है। फिर भी मैं शिकायत नहीं करता, क्योंकि यही मेरा कर्तव्य है।
धूप में भी मैं छाया देकर अपने मालिक को आराम पहुँचाता हूँ।
बरसात के बाद मुझे अक्सर कोने में रख दिया जाता है। वहाँ
मैं अगली बारिश का इंतज़ार करता हूँ। मुझे अच्छा लगता है जब मेरा ध्यान रखा जाता
है—सूखा कर रखना, संभालकर खोलना-बंद करना।
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि मैं भले ही निर्जीव हूँ, पर मनुष्य के
जीवन में मेरा अपना महत्व है। यदि मेरी सही देखभाल की जाए, तो मैं लंबे समय तक साथ निभा
सकता हूँ।
Dharti ka aangan mahake question answer pdf | धरती का आँगन महके स्वाध्याय
'विश्व शांति की माँग सर्वाधिक
प्रासंगिक हैं', इस तथ्य पर अपने विचार लिखो।
उत्तर:
आज की दुनिया अनेक समस्याओं से घिरी हुई है। युद्ध, आतंकवाद, हिंसा, धार्मिक और
जातीय संघर्षों के कारण मानव जीवन असुरक्षित होता जा रहा है। ऐसे समय में विश्व
शांति की माँग सर्वाधिक प्रासंगिक बन गई है। शांति के बिना न तो विकास संभव है और
न ही मानवता का कल्याण।
युद्ध और हिंसा से केवल जान-माल की हानि ही नहीं होती, बल्कि समाज
में भय, गरीबी और असमानता भी बढ़ती है। बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और लोगों
का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। इसके विपरीत, शांति का वातावरण होने पर देश
प्रगति करता है, विज्ञान और शिक्षा का विकास होता है तथा लोग मिल-जुलकर सुख से रहते हैं।
विश्व शांति केवल देशों के बीच नहीं, बल्कि समाज और
व्यक्ति के भीतर भी आवश्यक है। हमें एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करना चाहिए और
समस्याओं का समाधान संवाद से करना चाहिए, न कि हिंसा से। महात्मा गांधी, बुद्ध और नेल्सन मंडेला जैसे
महापुरुषों ने शांति और अहिंसा का संदेश देकर दुनिया को नई दिशा दिखाई।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि आज के युग में विश्व शांति की माँग
अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक है। शांति ही मानवता की सच्ची पहचान और उज्ज्वल भविष्य
की कुंजी है।
इस कविता में दीक्षित जी ने कर्म, ज्ञान, विज्ञान की
महत्वता स्थापित की है। उनके अनुसार हम ज्ञान विज्ञान के बल पर भले ही आसमान को
नापले परंतु शस्त्रों से मानवता को बचाना भी आवश्यक है और यह तभी संभव होगा जब
समाज में सदाचार और स्नेह बढ़ेगा।
Dharti ka aangan mahake bhavarth
प्राचीन
भारतीय शिल्पकला संबंधी सचित्र जानकारी संकलित करो, विशेष कलाकृतियों की सूची बनाओ।
अजंता एलोरा भारत के मुख्य हेरिटेज में से एक है।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थिल अजंता और एलोरा की गुफाएं एक-दूसरे से करीब
सौ किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन अपनी महत्वता की वजह से इन दोनों का नाम हमेशा
साथ में लिया जाता है। बड़े-बड़े पहाड़ और चट्टानों को काटकर बनाई गई ये गुफाएं
वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। गुफाओं के पास मौजूद गांव अजंता के नाम पर इन
गुफाओं का नाम पड़ा। अजंता की गुफाओं में अधिकांश दीवारों पर बौद्ध धर्म से जुड़ी
नक्काशी की गई है। जबकि एलोरा की गुफाओं में मौजूद वास्तुकला
और मूर्तियां बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म से जुड़ी हुई हैं। अजंता पूरे तीस गुफाओं का समूह है। भारत में आज भी कई विशेष कलाकृतियाँ उपस्थित है जो शिल्पकला का स्तम्भ स्थापित करती है- अजंता की गुफाएँ आलोरा गुफाएँ दक्षिण भारत की कला सिंधु कला बादामी के गुफा चित्र जैन कला अमरावती की कला
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