लकड़हारा और वन स्वाध्याय हिंदी आठवी | आठवी हिंदी digest
लकड़हारा और वन स्वाध्याय pdf | Lakadhara aur Van question answer
*
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१)
संजाल पूर्ण करो :
उत्तर:
(२)
संक्षेप में उत्तर लिखो :
१.
पेड़ द्वारा दिया गया संदेश -
उत्तर:
कभी हरा - भरा पेड़ मत काटो। उन्हें अपने बच्चों के समान पालो, ताकि चारों ओर
हरियाली छाई रहे!
२.
भगवान की शर्त -
उत्तर:
लकड़हरा तुम कभी हरा-भरा पेड़ नहीं काटोगे और ना ही लालच में पड़कर जरूरत से
ज्यादा सुखी लकड़ियाँ काटोगे।
लकड़हारा और वन question answer
Lakadhara aur Van swadhyay
३.
पेड़ों के उपयोग -
उत्तर:
पेड़ हमे शुद्ध हवा, पानी व भोजन प्रदान करते है।
४.
पेड़ों की कटाई के दुष्परिणाम –
उत्तर:
·
पेड़ों की
कटाई करने से वर्षा नहीं आएगी।
·
वन्य जीवों का
अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
·
मनुष्य को
शुद्ध हवा नहीं मिलेगी।
·
मनुष्य का
अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
Lakadhara aur Van question answer pdf
(3) कृति पूर्ण करो :
उत्तर:
(१)
निम्न वृत्त में दिए संज्ञा तथा विशेषण शब्दों को छाँटकर तालिका में उचित स्थानों
पर उनके भेद सहित लिखो :
नदी, पहाड़ी,सीता, वह लकड़हारा,पानी, चार किलो,गरीबी, ईमानदारी, गंगा,चाँदी,पालक,दस,कोई, सभा,धनी
उत्तर:
| संज्ञा | भेद | विशेषण | भेद |
|---|---|---|---|
| (१) नदी | जातिवाचक | (१) वह | सार्वनामिक |
| (२) पहाड़ी | जातिवाचक | (२) चार किलो | परिमाणवाचक |
| (३) सीता | व्यक्तिवाचक | (३) दस | संख्यावाचक |
| (४) लकड़हारा | जातिवाचक | (४) कोई | सार्वनामिक |
| (५) पानी | द्रव्यवाचक | (५) धनी | गुणवाचक |
| (६) गरीबी | भाववाचक | - | - |
| (७) ईमानदारी | भाववाचक | - | - |
| (८) गंगा | व्यक्तिवाचक | - | - |
| (९) पालक | जातिवाचक | - | - |
| (१०) चाँदी | द्रव्यवाचक | - | - |
| (११) सभा | समूहवाचक | - | - |
लकड़हारा और वन स्वाध्याय pdf | Lakadhara aur Van question answer
(२)
पाठ में प्रयुक्त कारक विभक्तियाँ ढूँढ़कर उनका वाक्यों में प्रयोग करो ।
उत्तर:
·
के- हम देश के
उज्ज्वल भविष्य है।
·
हे !- हे!
प्रभु, सब को खुश रखना।
·
से - हम कब से
आपका इंतजार कर रहे है।
·
को - हम को इस
बात का दुख है।
·
का- अब तो
भगवान का सहारा है।
·
में - हमें
भगवान में विश्वास रखना चाहिए।
·
पर- हम पर
उनका बहुत एहसान है।
·
के लिए - हम
उन के लिए ही तो आए है।
किसी
मराठी निमंत्रण पत्रिका का रोमन (अंग्रेजी) में लिप्यंतरण करो।
उत्तर:
मराठी
श्री. गणेश पाटील
१२, लक्ष्मीनगर,
कोथरूड,
पुणे – ४११०३८
दि. १५ जानेवारी, २०२६
सप्रेम नमस्कार,
आपणास
कळविताना अत्यंत आनंद होत आहे की, आमच्या नवीन वास्तूचा गृहप्रवेश व वास्तुशांती समारंभ
दि. २० जानेवारी २०२६, रोजी सकाळी ९.३० वाजता आयोजित केला आहे. हा मंगल प्रसंग आपल्या शुभ
उपस्थितीशिवाय अपूर्ण आहे.
तरी
आपण आपल्या परिवारासह या शुभप्रसंगी उपस्थित राहून कार्यक्रमाची शोभा वाढवावी, ही नम्र
विनंती.
आपल्या आगमनाची आम्ही आतुरतेने वाट पाहत आहोत.
आपलेच
रमेश
पाटील
Mr. Ramesh Patil
12, Laxminagar,
Kothrud,
Pune – 411038
Date: 15 January 2026
Dear Sir,
We are pleased to inform you that the House Warming and Vastu Shanti Ceremony
of our new residence has been arranged on Tuesday, 20 January 2026 at 9:30 a.m.
This auspicious occasion will be incomplete
without your gracious presence. We sincerely request you to attend the ceremony
along with your family and bless us on this joyful day.
We shall be delighted by your presence.
Yours lovingly,
Ramesh Patil
लकड़हारा और वन digest pdf | लकड़हारा और वन question answer pdf
किसानों
के सामने आने वाली समस्याओं की जानकारी प्राप्त करके उन समस्याओं को दूर करने हेतु
चर्चा करो।
किसानों की समस्याएँ:
1. किसानों को अच्छे और उन्नत बीज आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
2. खेती में मशीनीकरण का अभाव होने के कारण समय और श्रम अधिक लगता है।
3. भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण फसल सुरक्षित नहीं रह पाती।
4. पूँजी की कमी के कारण किसान आधुनिक साधन नहीं खरीद पाते।
5. परिवहन सुविधाओं का अभाव भी किसानों के लिए एक बड़ी बाधा है।
समस्याओं को दूर करने के उपाय:
1. कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
2. कृषि में अनुसंधान और विकास पर होने वाले खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 0.40 प्रतिशत से बढ़ाकर 1 प्रतिशत किया जाना चाहिए।
3. कृषि व्यय और विकास के साधनों में मौजूद असमानता को दूर किया जाना चाहिए।
4. सरकार को ऐसी योजनाएँ बनानी चाहिए, जिनसे किसान स्वयं अपनी फसल का उचित मूल्य तय कर सकें।
'प्रकृति हमारी गुरु' विषय पर अपने
विचार लिखो।
प्रकृति
हमारी गुरु
उत्तर:
मेरे विचार से प्रकृति हमारी सबसे बड़ी गुरु है। वह हमें
बिना बोले बहुत कुछ सिखाती है। पेड़ हमें धैर्य और निःस्वार्थता सिखाते हैं, क्योंकि वे
स्वयं धूप, हवा और बारिश सहकर भी हमें फल, फूल, छाया और ऑक्सीजन देते हैं। नदियाँ हमें निरंतर आगे बढ़ते
रहना सिखाती हैं और पहाड़ हमें अडिग रहना तथा कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर बने
रहना सिखाते हैं।
प्रकृति हमें अनुशासन और संतुलन का महत्व भी बताती है।
दिन और रात का समय पर आना, ऋतुओं का बदलना और सूर्य का नियमित उदय—ये सब हमें समय
का सही उपयोग करना सिखाते हैं। पक्षी सुबह उठकर मेहनत करते हैं और अपने लिए भोजन
जुटाते हैं, जिससे हमें परिश्रम का महत्व समझ में आता है।
प्रकृति हमें मिल-जुलकर रहना भी सिखाती है। जंगल में
पेड़, पशु, पक्षी और कीट—सभी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। इसी तरह हमें भी समाज में
सहयोग और प्रेम से रहना चाहिए। जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं, तो वह हमें
सुख और शांति देती है।
अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि यदि हम प्रकृति से
सीखें और उसकी रक्षा करें, तो हमारा जीवन सुखी और संतुलित रहेगा। सच में, प्रकृति हमारी
सच्ची और महान गुरु है।
विभिन्न
अवसरों पर शाला में खेले जाने वाले नाटकों के संवाद ध्यान देते हुए सुनो।
उत्तर: --------
किसी
भारतीय लोककथा की विशेषताओं के बारे में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करो।
उत्तर:
हम सबने बचपन में भारतीय लोककथाएँ सुनी हैं। ये कहानियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती रही हैं और आज भी हमें जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सिखाती हैं। भारतीय लोककथाओं की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—
1. सरल भाषा और शैली
भारतीय लोककथाएँ सरल और सहज भाषा में होती हैं, जिससे बच्चे और बड़े सभी आसानी से समझ सकें।
2. नैतिक शिक्षा (सीख)
हर लोककथा के अंत में कोई न कोई शिक्षा होती है, जैसे—सत्य की जीत, मेहनत का फल, ईमानदारी, बुद्धिमानी और दया।
3. लोकजीवन का चित्रण
इन कथाओं में गाँव, किसान, राजा, रानी, पशु-पक्षी और आम लोगों का जीवन दिखाया जाता है, जिससे हमें उस समय के समाज की जानकारी मिलती है।
4. पशु-पक्षियों का मानवीकरण
कई लोककथाओं में पशु-पक्षी बोलते और सोचते हुए दिखाए जाते हैं, जैसे पंचतंत्र की कथाएँ, जो कहानी को रोचक बनाती हैं।
5. कल्पना और रोचकता
लोककथाओं में कल्पना, चमत्कार और रहस्य होते हैं, जिससे सुनने वाला कहानी में पूरी तरह डूब जाता है।
6. संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान
भारतीय लोककथाएँ हमारी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को दर्शाती हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं।
विभिन्न
विधाओं से प्राप्त सूचनाओं, सर्वेक्षणों, टिप्पणियों को पढ़कर उनका संकलन
करो।
उत्तर:
1. समाचार पत्रों से प्राप्त सूचनाएँ
समाचार
पत्रों से हमें देश-विदेश की घटनाएँ, मौसम, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मिलती है। इनमें
तथ्यात्मक और अद्यतन सूचनाएँ होती हैं।
2. सर्वेक्षणों से प्राप्त सूचनाएँ
सर्वेक्षणों
से किसी विषय पर लोगों की राय, समस्याएँ और
आवश्यकताएँ पता चलती हैं। उदाहरण के लिए—किसानों की समस्याएँ, विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी कठिनाइयाँ आदि।
3. टिप्पणियों से प्राप्त सूचनाएँ
टिप्पणियों
में किसी विषय पर व्यक्ति के विचार, अनुभव और सुझाव होते हैं। इससे हमें विषय को गहराई से समझने में मदद मिलती
है।
4. पुस्तकों और लेखों से प्राप्त सूचनाएँ
पुस्तकों
और लेखों से विस्तृत, विश्वसनीय और
स्थायी जानकारी मिलती है। इनमें इतिहास, विज्ञान, पर्यावरण और समाज से जुड़े तथ्य
होते हैं।
5. प्रत्यक्ष अवलोकन से प्राप्त सूचनाएँ
अपने
आसपास की घटनाओं को देखकर और अनुभव करके भी बहुत-सी जानकारियाँ मिलती हैं, जैसे स्वच्छता की स्थिति, पर्यावरण प्रदूषण, यातायात की
समस्या आदि।
किसी लिखित सामग्री के उद्देश्य और उसके दृष्टिकोण के मुद्दों को समझकर उसे प्रभावपूर्ण शब्दों में लिखो।
उत्तर-
लिखित सामग्री इस प्रकार है।
कबीर
के दोहे
काल
करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में
परलय होएगी, बहुरि करेगा कब।
बोली
एक अनमोल है, जो कोई बोल जानि।
हिये
तराजू तौलि के, तब मुख बाहर अनि।।
अति
भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का
भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
उपरोक्त
लिखित सामग्री के उद्देश्य
·
कबीर के इन
दोहो के उद्देश्य, निम्नलिखित है।
·
समय के
महत्त्व से अवगत कराना।
·
शब्दों एवं
व्यवहार के महत्त्व को दर्शाना।
·
बाणी के
महत्त्व को समझाना है।
·
व्यंवहार एवं
बातो में सयंम दर्शाना ही इन दोहे का उद्देश्य है।
दृष्टिकोण
के मुद्दे
1) समय की उपयोगिता - कबीर जी ने समय की उपयोगिता सभी को समझाने का प्रयास
किया है कि, एक बार समय यदि हाथ सें निकल गया तों फिर वापस नहीं आता है। सभी को समय के
महत्त्व एवं उपयोगिता को समझाने के दृष्टीकोण को ध्यान में रखकर यह पद लिखा है।
(२) वाणी की उपयोगिता - वाणी का जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है।
वाणी का उपयोग मनुष्य को सोच समझकर सीमित शब्दों में करना चाहिए। वाणी ही व्यक्ति
के जीवन में अच्छा या बुरा प्रभाव डालती है। कबीर जी ने वाणी के प्रयोग, उसके प्रभाव, शब्दों के महत्त्व
इत्यादी के दृष्टीकोण को उपरोक्त पद में समझाने का प्रयास किया है।
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