अंधायुग स्वाध्याय हिंदी आठवी | आठवी हिंदी digest
अंधायुग कविता
का भावार्थ pdf |Andhayug question answer |Andhayug question answer pdf
सूचना
के अनुसार कृतियाँ करो :-
(१)
कृति करो :
(२)
संजाल पूर्ण करो :
(३)
उत्तर लिखो :
अंधायुग स्वाध्याय | अंधायुग स्वाध्याय हिंदी |अंधायुग digest pdf
१.
पाठों में आए मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका अपने स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग करो :
उत्तर:
1) लोहा
मानना - श्रेष्ठता स्वीकार करना|
वाक्य: सबने रामू की कला को लोहा मान लिया है।
2) रंगे
हाथ पकड़ना - अपराध करते हुए प्रत्यक्ष पकड़ना |
वाक्य :
उसे लोगों ने रंगे हाथ पकड़ लिया है।
3) घोड़े
बेचकर सोना - निश्चिंत होकर सोना |
वाक्य :
उसे लोगों ने रंगे हाथ पकड़ लिया है।
4) अपने
पैरों पर कुल्हाड़ी
मारना - स्वयं का नुकसान करना।
वाक्य :
पढ़ाई न करने के कारण वह फेल हो गया। उसने तो सचमुच अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार
ली।
4) खाली
हाथ रहना - पास में कुछ न होना |
वाक्य :
सब कुछ दान करने के बाद वह खाली हाथ रहा।
| वर्ण विच्छेद | वर्ण विच्छेद | वाक्य | वर्ण विच्छेद |
|---|---|---|---|
| मानवीय | म + आ + न + व + ी + य + अ | वाक्य | |
| सहायता | स + ह +ा + य + त + ा | शब्द | |
| मृदुल | म + ृ + द + ु + ल | व्यवहार |
| वर्ण विच्छेद | वर्ण विच्छेद | ||
|---|---|---|---|
| मानवीय | म + आ + न + व + ी + य + अ | वाक्य | व् + आ + क + ् + य + अ |
| सहायता | स + ह + आ + य + त + आ | शब्द | श + ब + ् + द |
| मृदुल | म + ृ + द + ु + ल | व्यवहार | व् + य + व + ह + आ + र |
अंधायुग question answer pdf | अंधायुग question answer
'कर्म ही पूजा है', विषय पर अपने
विचार सौ शब्दों में लिखो।
उत्तर:
‘कर्म ही पूजा है’ यह विचार हमें जीवन का सही मार्ग
दिखाता है। गीता में कहा गया है कि कर्म से बढ़कर मनुष्य का कोई धर्म नहीं है।
मनुष्य को अपना प्रत्येक कार्य ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। पूजा-पाठ तभी
सार्थक है, जब हमारा व्यवहार और कर्म अच्छे
हों। व्यक्ति को संसार में उसके कर्मों से ही पहचाना जाता है। मृत्यु के बाद भी
वही अपने अच्छे कर्मों के कारण याद किया जाता है। हमने देखा है कि जो व्यक्ति अपने
काम को सच्चाई और मेहनत से करता है, उसका जीवन अधिक सुखमय होता है। इसलिए हमें कर्म को ही अपनी सच्ची पूजा
मानना चाहिए।
अंधा युद्ध में युद्ध तथा उसके बाद की समस्याओं और
मानवीय महत्वाकांक्षाओं को प्रस्तुत किया गया है। यह प्रसंग उस समय का है जब श्री
कृष्ण जी की जीवन यात्रा समाप्त हो गई है। श्री कृष्ण ने अपना संपूर्ण उत्तरदायित्व
पृथ्वी के हर प्राणी को सौंप दिया है।
निम्नलिखित
मुद्दों के आधार पर कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दो।
उत्तर:
शीर्षक:
मज़ाक की सज़ा
एक गाँव में एक दर्जी की छोटी-सी दुकान थी। वह रोज़
सिलाई का काम करके अपना जीवन चलाता था। उसी गाँव से होकर प्रतिदिन एक हाथी नदी पर
नहाने जाया करता था। रास्ते में वह दर्जी की दुकान के सामने से गुजरता। दर्जी को
हाथी बहुत पसंद था, इसलिए वह रोज़
हाथी को केले खिलाता। हाथी भी उसे पहचानने लगा और सूँड़ उठाकर केला ले लेता था।
दोनों के बीच एक अनोखी मित्रता बन गई थी।
एक दिन दर्जी के मन में मज़ाक सूझा। जब हाथी रोज़ की तरह
दुकान के पास आकर खड़ा हुआ और सूँड़ आगे बढ़ाई, तो दर्जी ने केले की जगह उसकी सूँड़ में सुई चुभा दी। हाथी को बहुत दर्द
हुआ। वह गुस्से में चिंघाड़ता हुआ नदी की ओर चला गया, लेकिन कुछ नहीं बोला।
नदी पर नहाने के बाद हाथी ने बदला लेने की ठानी। उसने
अपनी सूँड़ में कीचड़ भरा और वापस आते समय दर्जी की दुकान में पूरी कीचड़ उछाल दी।
दुकान,
कपड़े और दर्जी खुद कीचड़ से भर गए। दर्जी को अपनी गलती
का एहसास हुआ और उसे बहुत पछतावा हुआ।
शिक्षा:
मज़ाक की भी एक सीमा होती है। किसी को दुख पहुँचाने वाला मज़ाक हमेशा
नुकसान ही करता है।
Andhayug bhavarth | Andhayug question answer pdf
'मनुष्य का भविष्य उसके
हाथों में है' अपने विचार लिखो।
उत्तर:
मनुष्य का भविष्य उसके हाथों
में है
मेरे
विचार से मनुष्य का भविष्य पूरी तरह उसके अपने हाथों में होता है। मनुष्य जैसा आज
परिश्रम करता है, वैसा ही उसका कल बनता है। अगर वह समय का
सही उपयोग करे, मेहनत से पढ़ाई करे और अच्छे कर्म करे,
तो उसका भविष्य उज्ज्वल होता है।
हम
अक्सर भाग्य को दोष देते हैं, लेकिन वास्तव में सफलता परिश्रम से
मिलती है। जो व्यक्ति कठिनाइयों से घबराता नहीं और लगातार प्रयास करता रहता है,
वही आगे बढ़ता है। विद्यार्थी जीवन में की गई मेहनत ही भविष्य की
नींव रखती है।
मनुष्य
के अच्छे और बुरे कर्म उसके जीवन को दिशा देते हैं। अच्छे कर्म उसे सम्मान और सुख
दिलाते हैं, जबकि गलत कार्य उसे पीछे ले जाते हैं। इसलिए हमें
सही मार्ग चुनना चाहिए।
अंत
में मैं यही कहना चाहूँगा कि यदि हम आज सही निर्णय लें, ईमानदारी से काम करें और आत्मविश्वास रखें, तो हमारा
भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होगा। सच में, मनुष्य का
भविष्य उसके अपने हाथों में ही है।
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